क्या आप गर्भवती होने पर सोफे पर बैठ सकती हैं?HealthPlanet

Posted on Fri 11th Nov 2022 : 09:34

क्या गर्भावस्था में जमीन पर पालथी मारकर बैठना सुरक्षित है?

समान्यत: इस तरह बैठना सुरक्षित है। जब तक आपको पालथी मारकर बैठने में आराम मिलता हो, आप ऐसे बैठ सकती हैं।

पालथी मारकर बैठना हमारी बचपन की आदत होती है और कई पारंपरिक घरों में आज भी खाना पालथी मारकर बैठकर ही खाया जाता है। बहुत सी महिलाएं घर के कुछ विशिष्ट काम पालथी मारकर बैठकर ही करना पसंद करती हैं। या फिर जब वे आराम करना चाहती हैं तो इस तरह बैठती हैं।

अधिकांश धार्मिक कार्यक्रमों में पालथी मारकर ही बैठा जाता है। कुछ योगासनों और ध्यान (मेडिटेशन) के दौरान भी पालथी मारकर बैठते हैं।

पालथी मारकर बैठने के साथ कई मिथक जुड़े हुए हैं और गर्भवती महिलाओं को विशेषतौर पर इस अवस्था में बैठने के लिए अक्सर मना किया जाता है। इसके निम्नांकित कारण माने जाते हैं:

इससे अजन्मे शिशु का सिर समतल हो जाता है
गर्भनाल उलझ सकती है
पेट में पल रहे शिशु को असहजता होती है

इन मान्यताओं को सिद्ध करने के लिए कोई प्रमाण मौजूद नहीं हैं।

वहीं दूसरी तरफ कुछ गर्भवती महिलाओं को विशेषकर पालथी मारकर बैठने की सलाह दी जा सकती है। यह एक अन्य मान्यता पर आधारित है कि यह अवस्था शिशु को प्रसव के लिए उचित अवस्था में लाने में मदद करती है। जिस भी अवस्था में बैठने से श्रोणि खुलती है, वो अवस्था श्रोणि को प्रसव के लिए तैयार करने में मदद कर सकती है। मगर इसे लेकर कोई अध्ययन उपलब्ध नहीं हैं।

बद्धाकोनासन, जिसमें पैर के तलवे एक दूसरे को छूते हैं और घुटने अलग होते हैं, वह भी पालथी मारकर बैठने की मुद्रा जैसा ही है, और फिजियोथैरेपिस्ट ऐसा करने की सलाह देते हैं, क्योंकि:

यह प्रसव के लिए तैयार श्रोणि को खोलने और कूल्हे के जोड़ों को ढीला करने में मदद करता है।
आपकी मुद्रा में सुधार करता है और निचली पीठ पर दबाव कम करता है।

हालांकि, उन गर्भवती महिलाओं को पालथी मारकर बैठने की सलाह नहीं दी जाती, जिन्हें निम्नांकित परेशानी हो:

श्रोणि करधनी दर्द (पीजीपी)
श्रोणि क्षेत्र में दर्द (एसपीडी)


ऐसा इसलिए क्योंकि इस अवस्था में श्रोणि असमतल अवस्था में होती है, जिससे टांगों पर असमान वजन पड़ता है। इसकी वजह से असहजता और दबाव पड़ सकता है।

यह भी संभव है कि ज्यादा लंबे समय तक पालथी मारकर बैठने से आपकी टांगों और टखनों पर दबाव पड़े। इससे रक्त संचरण में बाधा हो सकती है, जिससे सूजन (इडिमा) या वेरीकोज वेन्स की समस्या हो सकती है।

ध्यान रखें कि न केवल पालथी मारकर मगर किसी भी अवस्था में लंबे समय तक बैठे रहने से पीठ पर दबाव पड़ सकता है। श्रोणि को थोड़ा झुकाने से आपको लगातार बैठने या खड़े होने से पीठ पर पड़ने वाले दबाव से राहत मिल सकती है।

जब आप बैठी हों तो धीरे-धीरे अपनी श्रोणि को आगे-पीछे करें। पहले अपनी पीठ को थोड़ा आगे की तरफ झुकाएं और फिर अंगड़ाई लेने की अवस्था में छाती को थोड़ा बाहर निकाले और पीठ पर थोड़ा खिंचाव बनाएं।

इस सबके बावजूद यह जरुरी है कि आप अपने शरीर के संकेतों को पहचाने और पीठ दर्द, असहजता, झनझनाहट या सुन्नता महसूस होने पर अपनी अवस्था बदल लें। आप अपनी असहजता व पीड़ा के बारे में डॉक्टर से सलाह लें।

आप शायद पाएंगी कि गर्भावस्था के बढ़ने के साथ-साथ पेट बड़ा होने पर आप इतनी चुस्त नहीं रह पाती। आपको शायद फर्श पर बैठने और उठने में असहजता और परेशानी होगी। यदि ऐसा हो, तो किसी आरामदेह कुर्सी या कम ऊंचाई वाले स्टूल पर बैठें।

शिशु के जन्म के बाद आप फिर से पालथी मारकर बैठना शुरु कर सकती हैं। वास्तव में बहुत सी महिलाएं शिशु को स्तनपान करवाने के लिए यही अवस्था चुनती हैं।

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